Bha Bha Ba मूवी रिव्यू: दिलीप की मास एक्शन कमबैक

जब दिलीप जैसे बड़े कलाकार की कोई मास एक्शन फिल्म आती है, तो दर्शकों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। लगता है कि दमदार डायलॉग्स, सशक्त किरदार और प्रभावशाली कहानी देखने को मिलेगी।
लेकिन Bha Bha Ba इन सभी उम्मीदों को तोड़ते हुए एक ऐसी फिल्म बन जाती है जो ज़्यादा शोर करती है, कम मतलब की बात कहती है।

यह फिल्म कमबैक से ज़्यादा एक खोया हुआ मौका लगती है।


कहानी: आखिर Bha Bha Ba है किस बारे में?

फिल्म की सबसे बड़ी समस्या यही है कि यह खुद नहीं जानती कि कहना क्या चाहती है

  • कभी एक्शन
  • कभी राजनीति
  • कभी ड्रामा
  • कभी जबरदस्ती का कॉमेडी टच

कहानी बिना किसी ठोस दिशा के आगे बढ़ती है। सीन एक-दूसरे से जुड़े हुए नहीं लगते और कई जगह दर्शक सोचता रह जाता है कि यह सब क्यों हो रहा है।

इंटरवल तक पहुँचते-पहुँचते सवाल उठता है:
“क्या इस फिल्म की कोई साफ़ कहानी भी है?”


दिलीप का अभिनय: मेहनत है, लेकिन दिशा नहीं

इसमें कोई शक नहीं कि दिलीप ने मेहनत की है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, गुस्सा और एनर्जी साफ़ दिखती है।

जो अच्छा लगा:

  • स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी अब भी असरदार है
  • कुछ सीन में पुराना दिलीप झलकता है

जो नहीं चला:

  • किरदार में गहराई नहीं
  • हर सीन में लगभग एक-सा अभिनय
  • डायलॉग्स बनावटी और पुराने ज़माने के
  • भावनात्मक जुड़ाव पूरी तरह गायब

नतीजा यह कि मास हीरो बनने की कोशिश में किरदार कार्टून जैसा लगने लगता है।


Bha Bha Ba X review: Dileep's Malayalam thriller gets positive buzz |  Regional-cinema News – India TV

निर्देशन और स्क्रीनप्ले: सबसे कमजोर कड़ी

निर्देशन पूरी फिल्म को डुबो देता है।

  • सीन अचानक शुरू होते हैं
  • बिना असर छोड़े खत्म हो जाते हैं
  • इमोशनल मोमेंट्स जल्दबाज़ी में निपटा दिए जाते हैं
  • कोई सही बिल्ड-अप नहीं

स्क्रीनप्ले ऐसा लगता है जैसे पहली ड्राफ्ट को ही फाइनल मान लिया गया हो।


एक्शन सीक्वेंस: ज़्यादा शोर, कम असर

मास फिल्मों की जान एक्शन होता है, लेकिन Bha Bha Ba में एक्शन बेहद साधारण है।

  • ज़रूरत से ज़्यादा स्लो-मोशन
  • बेवजह तेज़ बैकग्राउंड म्यूज़िक
  • फिज़िक्स को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया
  • कोई याद रहने वाला सीन नहीं

तालियाँ बजने के बजाय दर्शक थक जाता है।


म्यूज़िक और बैकग्राउंड स्कोर: भावना नहीं, सिर्फ़ आवाज़

बैकग्राउंड स्कोर हर सीन को जबरदस्ती बड़ा बनाने की कोशिश करता है।

  • जहाँ चुप्पी चाहिए, वहाँ शोर
  • एक-जैसे बीट्स बार-बार
  • गाने कहानी का फ्लो तोड़ते हैं

म्यूज़िक कहानी को सहारा देने के बजाय उसे और भारी बना देता है।


सहायक कलाकार: सिर्फ़ भराव

सपोर्टिंग कास्ट का इस्तेमाल बस इन कामों के लिए किया गया है:

  • हीरो की तारीफ़
  • पिटना
  • बेकार के डायलॉग बोलना

किसी भी किरदार को सही ढंग से उभरने का मौका नहीं मिलता।


तकनीकी पक्ष: औसत से भी नीचे

  • सिनेमैटोग्राफी: साधारण
  • एडिटिंग: धीमी और बिखरी हुई
  • प्रोडक्शन वैल्यू: कई जगह पुरानी और सस्ती

आज के समय में जब मलयालम सिनेमा नए प्रयोग कर रहा है, Bha Bha Ba बहुत पिछड़ी हुई लगती है।


Bha Bha Ba कहाँ चूक जाती है

✔ मास फिल्म को सिर्फ़ शोर समझ लिया
✔ स्टार पावर पर ज़्यादा भरोसा
✔ कहानी को नज़रअंदाज़ किया
✔ पुराने फॉर्मूले दोहराए
✔ दर्शक से भावनात्मक रिश्ता नहीं बनाया


अंतिम फैसला: निराशाजनक कमबैक

Bha Bha Ba दिलीप के करियर की वो फिल्म नहीं है जो उन्हें दोबारा ऊँचाई पर ले जाए। यह एक ऐसी फिल्म है जो साबित करती है कि सिर्फ़ नाम से फिल्म नहीं चलती

रेटिंग: ⭐⭐☆☆☆ (2/5)

देखें या नहीं?
अगर आप सिर्फ़ दिलीप के कट्टर फैन हैं, तो देख सकते हैं। बाकी दर्शकों के लिए यह फिल्म समय की बर्बादी साबित हो सकती है।

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