शुरुआत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोमांचक था। काम आसान हुआ, समय बचा, और नई संभावनाएं खुलीं।
लेकिन 2026 में एक नई भावना उभर कर सामने आ रही है — AI Fatigue।
लोग तकनीक के खिलाफ नहीं हैं,
लेकिन वे हर जगह, हर समय AI की मौजूदगी से मानसिक रूप से थकने लगे हैं।
AI Fatigue क्या है?
AI Fatigue उस मानसिक और भावनात्मक थकान को कहा जाता है जो लगातार AI टूल्स, ऑटोमेशन और मशीन-ड्रिवन सिस्टम्स के इस्तेमाल से पैदा होती है।
इसके लक्षण साफ़ दिखने लगे हैं:
- बहुत ज़्यादा टूल्स से उलझन
- हर काम में AI की दखल
- खुद सोचने और बनाने की प्रेरणा में कमी
- यह एहसास कि इंसान पीछे छूट रहा है
सीधा सवाल यही है:
क्या हर चीज़ में AI ज़रूरी है?
2026 में AI Fatigue क्यों ट्रेंड कर रहा है
1. AI अब हर जगह है
ऑफिस, पढ़ाई, कंटेंट, कस्टमर सपोर्ट, सोशल मीडिया—
हर जगह AI मौजूद है।
जब सब कुछ ऑटोमैटिक हो जाता है,
तो कुछ भी खास नहीं लगता।
2. क्रिएटिविटी पर दबाव
लेखक, डिज़ाइनर, कलाकार और क्रिएटर्स महसूस कर रहे हैं कि:
- तेज़ बनाने का दबाव
- मशीन से तुलना
- ओरिजिनल काम की वैल्यू कम होना
मदद की जगह थकान पैदा हो रही है।
3. भरोसे की कमी
आज यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि:
- क्या असली है
- क्या एडिटेड है
- क्या AI ने बनाया है
जब भरोसा घटता है,
तो थकान बढ़ती है।
लोग AI Fatigue से कैसे निपट रहे हैं
दिलचस्प बात यह है कि लोग AI को छोड़ नहीं रहे,
बल्कि सीमाएं तय कर रहे हैं।
- ज़रूरत पर ही AI का इस्तेमाल
- ह्यूमन-मेड कंटेंट को प्राथमिकता
- कम टूल्स, ज़्यादा फोकस
- ब्रेक लेना सीखना
अब “ह्यूमन टच” एक नई ताक़त बनता जा रहा है।
वर्कप्लेस में AI Fatigue
कई कंपनियां यह नोटिस कर रही हैं:
- नए टूल्स को लेकर उत्साह कम
- कर्मचारियों में ओवरलोड
- प्रोडक्टिविटी की जगह कन्फ्यूज़न
जो कंपनियां समझदार हैं,
वे और AI जोड़ने की जगह उसे सरल बना रही हैं।

क्या AI Fatigue AI के लिए खतरा है?
नहीं।
लेकिन यह एक चेतावनी ज़रूर है।
भविष्य उसी AI का है जो:
- इंसान को सपोर्ट करे
- उसे रिप्लेस न करे
- फैसले में मदद दे, कंट्रोल न छीने
“हर जगह AI” से “जहां ज़रूरी हो वहां AI” तक
2026 का साफ़ संकेत:
- कम दिखावा
- ज़्यादा सोच-समझ
- ऑटोमेशन से पहले इंसान
लोग चाहते हैं कि AI साथ चले,
आगे न भागे।
यह ट्रेंड क्यों अहम है
AI Fatigue तकनीक के खिलाफ नहीं है।
यह इंसान के पक्ष में है।
यह हमें याद दिलाता है:
- स्पीड सब कुछ नहीं
- ऑटोमेशन की भी सीमा है
- रचनात्मकता को जगह चाहिए
- मतलब, मशीन से ज़्यादा इंसान में है
अंतिम विचार
AI Fatigue 2026 में एक ब्रेक है—
सोचने का मौका।
सवाल यह नहीं है कि
हम क्या ऑटोमेट कर सकते हैं,
सवाल यह है कि
हमें क्या नहीं करना चाहिए।
भविष्य उसी का है
जो तकनीक को कंट्रोल करे—
तकनीक जिसके कंट्रोल में न हो।